बिहार की प्रमुख जनजातियाँ – Major Tribes of Bihar


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Major Tribes of Bihar, आज के इस पोस्ट में हमलोग बिहार की प्रमुख जनजातियाँ के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे|

वर्तमान समय में भी बिहार में कई प्रकार की जनजातियाँ निवास करती है| दरअसल हमलोग जनजाति उस वर्ग के लोगो को कहते है तो समाज से भिन्न रहते है, जिसका रहन-सहन भी समाज से भिन्न होता है, साथ-ही ये लोग आज भी पुराने रीति-रिवाजों को ही ज्यादा मान्यता देते है| सभी जनजातियों की भाषा भी भिन्न-भीना होती है|

प्रतियोगी परीक्षा में अक्सर जनजातियों से जुड़े सवाल पूछे जाते है, इसीलिए अगर आप भी प्रतियोगी परीक्षा जैसे एसएससी, बैंक, रेलवे, BPSC, UPSC आदि के लिए तैयारी कर रहे है तो आज का यह पोस्ट आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाला है|

बिहार की प्रमुख जनजातियाँ Major Tribes of Bihar

आइये बिहार में पाए जाने वाले सभी जनजातियों के बारे में विस्तार से जानने है-

  1. संथाल

वैसे तो संथाल जनजाति मुख्य रूप से बिहार के निकट स्थित राज्य, झारखण्ड में निवास करती है, लेकिन बिहार में कुछ जिलो में भी संथाल जनजाति के लोग रहते है| संथाल जनजाति के लोग बिहार में मुख्य रूप से कटिहार, पूर्णिया भागलपुर आदि के क्षेत्र में पाए जाते है|

इस जनजाति का सम्बन्ध प्रोटोऑस्ट्रेलाइड परिवार से माना गया है| इस जनजाति के लोगो के भाषा को “संथाली” कहा जाता है जो एक ऑस्ट्रोएशियाटिक परिवार की भाषा है| संथाल जनजाति मुख्य रूप से “सिंगबोंगा” देवता का पूजा करते है|

2. मुंडा

वैसे तो मुंडा जनजति के लोग भी मुख्य रूप से झारखण्ड के छोटा नागपुर के क्षेत्र में निवास करते है लेकिन इस जनजाति के लोग बिहार में रोहतास और बक्सर जिले के कुछ क्षेत्र में पाए जाते है| इनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को “मुंडारी” कहते है| इस जनजाति के लोग भी संथाल जनजाति की भांति “सिंगबोंगा” देवता की पूजा को महत्व देते है| अधिकांश मुंडा जनजाति के लोग झूम कृषि पर आश्रित है|

3. गोंड

गोंड मुख्य रूप से मध्यप्रदेश की जनजाति है लेकिन बिहार के कुछ क्षेत्र जैसे रोहतास, छपरा, चंपारण में भी पाए जाते है| इस जनजाति के अधिकाशं लोग गैर-आदिवासी वर्ग के लोगो के साथ भी घुल-मिलकर रहते है| इसके द्वारा बोले जाने भाषा “मुंडारी” ही है|

4. खोंड

खोंड जनजाति मुख्य रूप से ओडिशा की जनजाति है| इसका सम्बन्ध एंस्त्रो-एशियाटिक परिवार से माना गया है| इस जनजाति के लोग बिहार में मुख्य रूप से शाहाबाद के क्षेत्र में पाए जाते है|

खोंड जनजाति के लोग औषधीय पौधों के बारे में अच्छी जानकारी रखते है, ये लोग रोगों की उपचार के लिए औषधीय पौधे के द्वारा की करते है|

इस जनजाति के द्वारा बोली जाने वाली भाषा को “सदानी” कहा जाता है|

5. उराँव

उराँव जनजाति को “कुड़ख” के नाम से भी जाना जाता है| यह जनजाति मुख्य रूप से भारत के पूर्वी राज्यों के कुछ क्षेत्र में निवास करता है|

इस जनजाति का सम्बन्ध प्रोटोऑस्ट्रेलाइड और द्रविड़ परिवास से माना गया है| इस जनजाति के द्वारा बोली जाने वाली भाषा को उराँव या कुड़ख ही बोला जाता है|

6. बेड़िया

वर्ममान समय में अधिकांश बेड़िया जनजाति के लोग उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश इ कुछ क्षेत्रों में पाए जाते है, लेकिन यह जनजाति सर्वप्रथम बिहार, झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में निस्वास करती है| अभी भी बिहार के मुंगेर जिले के कुछ क्षेत्र में बेड़िया जनजाति के लोग रहते है|

इस जनजति के लोग प्राय बिखरकर ही रहते है, और जहाँ रहते है उसी के स्थानीय भाषा को बोलकर एक-दुसरे से संवाद करते है|

7. खैरवात

यह जनजति भी मुख्य रूप से बिहार के निकट स्थित राज्य झारखण्ड में निवास करती है लेकिन बिहार के रोहतासगढ़ जिले के कुछ क्षेत्र में भी पाए जाते है| इस जनजाति के द्वारा बोली जाने वाली भाषा को “मुंगरी” कहा जाता है

8. गोराइत

यह जनजाति प्राय गया तथा भोजपुर के कुछ क्षेत्र में पाए जाते है जो प्रोटोऑस्ट्रेलाइड समूह से सम्बंधित है| गोराइत जनजाति के लोग प्राय अकेले रहना पसंद करते है और एकल परिवार की पध्दति को अपनाते है|

9. चेरो

यह जनजाति मुख्या रूप से झारखण्ड में स्थित पलामू के क्षेत्र में पाए जाते है| लेकिन बिहार कुक कुछ क्षेत्र जैसे गया, रोहतास, भोजपुर और मुंगेर जिले में भी यह जनजति निवास करती है| चेरो जनजाति के लोग कुछ को त्रिय और चौहानांशीय राजपूत मानते है|

आज के इस पोस्ट के माध्यम से हमने बिहार की प्रमुख जनजातियाँ (Major Tribes of Bihar) पर चर्चा किया| उम्मीद है कि इस पोस्ट के माध्यम से शेयर की गयी जानकारी आपको अवश्य पसंद आई होगी| अगर पोस्ट पसंद आया तो अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करे| और अपना सुझाव कमेंट में लिखना न भूले|

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