समुद्रगुप्त का जीवन परिचय तथा इतिहास


Join WhatsAppClick Here
Premium NotesJoin Telegram

आज के इस पोस्ट में हमलोग समुद्रगुप्त का इतिहास और सम्पूर्ण जीवन परिचय का विवरण बहुत ही विस्तार से तथा सरल भाषा में करेंगे| अगर आप भी समुद्रगुप्त के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो इस पोस्ट को पूरा जरुर पढ़े|

सम्राट समुद्रगुप्त, प्राचीन भारत में गुप्त वंश का चौथा शासक था, जो खुद को लिच्छवी की नाती कहता था| समुद्रगुप्त का नाम भी भारत के प्राचीन समय के महान राजाओं के सूची में विराजमान है| इसका भी लक्ष्य भारत को एकता के सूत्र में बाँधने का था|

समुद्रगुप्त का जीवन परिचय तथा इतिहास

समुद्रगुप्त का जन्म 335 ईस्वी में इन्द्रप्रस्थ (वर्तमान दिल्ली) में हुआ था, इसका पिता का नाम चन्द्रगुप्त प्रथम और माता का नाम कुमार देवी था| और यह खुद को लिच्छवी का दौहित यानि लिच्छवी का नाती कहता था| समुद्रगुप्त को बचपन में “कांच और कचा” के नाम से जाना जाता था| लेकिन इन्होने अपने साम्राज्य को समुन्द्र तक फैलाया और अपना नाम खुद ही “समुद्र” रख लिया| क्युकि यह गुप्त वंश से ताल्लुक रखते थे इसीलिए इसका पूरा नाम समुद्रगुप्त पड़ा|

चन्द्रगुप्त प्रथम की मृत्यु उपरान्त उन्होंने समुद्रगुप्त को गुप्त वंश का नया शासक बनाया| समुद्रगुप्त के शिलालेखों के अनुसार, समुद्रगुप्त, गरीबो की मदद करने वाला दलायु शासक था और इन्होने वैसे सारे राजाओं का राज्य वापस कर दिए जो इनसे युद्ध में हार चुके थे|

समुद्रगुप्त का रुझान कला के प्रति भी था और उन्होंने कई कविताएं भी लिखा है इसीलिए इसे ” कवियों का राजा” भी कहा जाता था, क्युकि इसके शासक काल में कविओं को बहुत मदद मिलने लगा और कविओं के कला को भी सम्मान मिलने लगा, जिससे समुद्रगुप्त के राज्य में रहने वाले सभी कवी इनसे बहुत खुश थे|

समुद्रगुप्त का इतिहास

  • यह चन्द्रगुप्त प्रथम और कुमार देवी का पुत्र था, इसीलिए यह खुद को लिच्छवी का दौहित (लिच्छवी का नाती) कहता था|
  • इसे बचपन में कांच के नाम से जाना जाता था|
  • समुद्रगुप्त की नीतियाँ आक्रामक और विस्तार वाड़ी थी| अत: तह आशिक के विपरीत था|
  • इसने उत्तर भारत के राज्यों को जीतकर अपने राज्य में मिला लिया था|
  • और साथ-ही दक्षिण भारत के 12 राजाओं को पराजित करके उनसे कर वसूलता था|
  • इन्ही विजय अभियान के कारन समुद्रगुप्त को “धरणी बंध” कहा जाता है|
  • इतिहासकार “B. S. Smith” ने समुद्रगुप्त की तुलना “नेपोलियन” से की है|
  • पुराण में कहा गया है की समुद्रगुप्त का घोडा 3 समुद्र का पानी पिता था, अर्थात समस्त दक्षिक भारत समुद्रगुप्त के आगे नत मस्तक था|
  • शीलंका के शासक ने बौध गया में मंदिर बनवाने के लिए अपना एक दूत समुद्रगुप्त के दरवार में भेजा था|
  • और समुद्रगुप्त ने उसे मंदिर बनवाने की अनुमति दे दिया था|
  • समुद्रगुप्त के विजय अभियान की जानकरी “प्रयाग प्रशस्ती” अभिलेख के प्राप्त होती है|
  • यह अभिलेख समुद्रगुप्त के दरवारी कवी तथा महासंघ विग्राहक हरिसेन का था|
  • समुद्रगुप्त ने कृष्णचरित्र पुस्तक की रचना की थी, जिसके कारण इसे कविराज कहा गया|
  • समुद्रगुप्त को सिक्कों पर वीणा बजाते हुए थे सैनिक वैश-भूषा में देखा गया है|
  • इसके शासक काल में सबसे अधिक प्रचलित सिक्का मयूर शैली का सिक्का था|
  • समुद्रगुप्त के बाद रामगुप्त शासक बना|
  • रामगुप्त एक अयोग्य शासक था|
  • रामगुप्त की पत्नी का नाम देवी था|
  • देवी ने रामगुप्त के छोटे भाई चन्द्रगुप्तII के साथ मिलकर खुद के ही पति रामगुप्त की हत्या करवा दी थी|
  • इसकी जानकारी विशाखदत्त की पुस्तक “देवी चन्द्रगुप्तम” में मिलती है|

समुद्रगुप्त के द्वारा जरी किया गया सोने का सिक्का

प्राचीन भारत के महान राजा समुद्रगुप्त ने अपने शासक काल में सोने के बने सिक्को को प्रचालन में लाया था| कई इतिहासकारों के अनुसार समुद्रगुप्त ने कुषाण साम्राज्य के शासक वासुदेव द्वितीय के सिक्कों की नकल करके की सोने के सिक्कों का निम्न अपने राज्य के लिए करवाया था|

वासुदेव द्वितीय के सिक्कों पर जिस तरह से वासुदेव को दिखाया गया है ठीक उसी प्रकार समुद्रगुप्त के सिक्कों में समुद्रगुप्त को दिखाया गया है और कलाकारी भी लगभग समान है|

समुद्रगुप्त में द्वारा जारी किये गए सोने के सिक्कों के प्रकार कुछ इस प्रकार है-

  1. मानक
  2. तीरंदाज
  3. युद्ध-कुल्हाड़ी
  4. बाघ कातिल
  5. संगीतकार
  6. अश्वमेध

और अंत में समुद्रगुप्त की मृत्यु पाटलिपुत्र में हो गयी जो वर्तमान समय में पटना के नाम से विख्यात है, और बिहार राज्य की राजधानी भी है| इसकी मृत्यु के बाद रामगुप्त को शासक बनाया गया जो शासन करने योग्य नहीं था और फिर रामगुप्त की पत्नी “देवी” ने रामगुप्त के छोटे भाई चन्द्रगुप्त-II के साथ मिलकर रामगुप्त की हत्या कर दी, और नया शासक चन्द्रगुप्त-II बना

अन्य महत्वपूर्ण पोस्ट-


Leave a Comment